प्रधान / सदस्य

ग्राम पंचायत रजनहियाँ
ब्लॉक : चिराईगाँव
पोस्ट :
सारनाथ
थाना : सारनाथ
जिला : वाराणसी – 221007
पंचायत में कुल वार्डों की संख्या : 11
पंचायत का सालाना बजट : 10 लाख लगभग
बी. पी. एल. परिवार : 67
ए.पी.एल.: 250

ग्राम प्रधानम : बाबूलाल यादव
उम्र : 32 वर्ष
कार्य : ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले समस्त गाँव के विकास कार्य को देखना एवं उन गाँव का समुचित विकास करना.
सचिव : श्री बृजेश कुमार

पंचायत सदस्य :- 11

नाम शिक्षा  पिता/पति मोबाइल नं० पता कार्य
निर्मला देवी





रामचंदर





निर्मला
























































































पंचायत का क्षेत्रफल: 360 हेक्टेयर लगभग
पंचायत की कुल जनसंख्या: 7543 लगभग (पुरुष-40% महिला-35% बुजुर्ग-10% बच्चे-15%)
जनसंख्या घनत्व : 400 व्यक्ति / वर्ग कि०मी० लगभग
साक्षरता : 60% लगभग

शिक्षा केंद्र

   

प्राइमॅरी विधालयों की संख्या
01
माध्यमिक विधालयों की संख्या
00
इंटर कॉलेजों की संख्या
00
डिग्री कॉलेजों की संख्या
00
आँगन बाड़ी केंद्रों की संख्या
01
पौंड शिक्षा केंद्रों की संख्या 00
रात्रि शिक्षा केंद्रों की संख्या
00
कंप्यूटर शिक्षा केंद्रों की संख्या
00
तकनीकी शिक्षा केंद्रों की संख्या
00
अध्यापकों की संख्या
01
अध्यापीकाओं की संख्या
01
शिक्षा मित्रों की संख्या
02
प्रधानाचार्यों की संख्या
01
छात्रों की संख्या
140
छात्राओं की संख्या
70

कृषि

गाँव में रबी, खरीफ व धन देने वाली फसल का उत्पादन होता है। देश में हरित क्रांति में जब से बिजली का आगमन हुआ तो किसानों के साथ खेती से जुडे लोगों की स्थिति ही बदल गई। इसके बाद खेतों में ट्यूब वेल लगे और किसानों नें खरीब की फसल के साथ ही रबी की फसल का भी उत्पादन करना शुरू किया। गाँव की अधिकांश कृषि भूमि पर रबी की फसल होने लगी। गांव में रबी की फसल में गैहूं,चना,जौ,मैथी,सरसों आदि फसलों का उत्पादन होता है। खरीफ की फसल में बाजरा, मूंग, ज्वार, बाजरा,  आदि फसलों का उत्पादन किया जाता है। फसल में प्याज,लहसून,जीरा,धनिया आदि फसलों के साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। पिछले कई सालों के मुकाबलें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा उनके रहन सहन में बदलाव हुआ है।

कृषि विभाग की योजना:

  • माइक्रो मैनेजमेंट

  • आइसोपाम

  • कृषि सांखियकी सुधार योजना

  • कपास योगदान

  • फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादन आँकड़े

  • फसल बीमा योजना

  • कृषक प्रक्षेत्रों पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग

रहन-सहन

   

इस गाँव का रहन-सहन लगभग साधारण ही है जैसा की हर गाँव में होता है यहाँ के लोग कच्चे एवं पक्के मकान में रहते है जो लोग ग़रीब है उनको सरकार की तरफ से इंदिरा आवास के तहत मकान दिए गये है और जो सक्षम है वे अपने बनाएँ हुए मकान में रहते है गाँव के अधिकतर लोग खेती पर निर्भर है और कुछ लोग नौकरी भी करते है चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट सभी लोग कुछ ना कुछ काम करते रहते है ताकी अपना और अपने परिवार का पेट भर सके!

संसाधन / सुविधाएँ

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प्रकतिक संसाधन
ग्राम पंचायत में सभी गाँव मे कुल मिलाकर 01 पोखर एवं 01 नदी है जिनसे गाँव वालों का काम होता है इन पोखरों, नदी से खेतों की सिचाई, गाँव के जानवरों को पीने का पानी एवं गाँव के बच्चे इन पोखरों / नदी में नहाते है गाँव की महिलाएँ कपड़े आदि भी धोती है गर्मी के समय इन पोखरों / नदी से गाँव वालों को पानी की ज़्यादा समस्या नही होती है और इनका काम होता रहता है! गाँव पंचायत में कुएँ भी है!

व्यक्तिगत संसाधन
ग्राम पंचायत में कुल 205 हॅंडपंप लगे हुए है जो की गाँव के लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार अपने-अपने घरों में लगा रख्खे है और कुछ हॅंडपंप ग्राम पंचायत ने सार्वजनिक लगाएँ है ताकि रह चलने वालों को पानी की समस्या न हो!

मानव संसाधन
ग्राम पंचायत के सभी गाँवों को मिलाकर करीब पंचायत में 30 प्रतिशत मजदूर, 40 प्रतिशत किसान, 30 प्रतिशत नौकरी एवं व्यापारी लोग रहते है किसान अपनी खेती करते है मजदूर खेतों एवं फॅक्टरी, दुकानों में मजदूरी, कुछ सरकारी-कुछ प्राइवेट नौकरी करते है और अपना एवं अपने परिवार का पालन पोषण करते है!

सांस्कृतिक संसाधन
ग्राम पंचायत में सांस्कृतिक भवन नही है पर यदि गाँव में कोई कार्यक्रम जैसे- शादी, होली, दीपावली, ईद, बकरीद आदि कार्यक्रम गाँव वाले मिल कर कराते है उसके लिए सांस्कृतिक भवन / सरकारी स्कूल के भवन आदि ले लेते है और कार्यक्रम समाप्त होने के पश्चात उसकी साफ-सफाई भी करते है!

यातायात के साधन
ग्राम पंचायत रोड से ज्यादा दूर नही है अतः किसी भी जगह से आने जाने के लिए बस और प्राइवेट साधन उपलब्ध हैं, परंतु सड़क से ग्राम पंचायत तक जाने के लिए पैदल या अपनी सवारी से यात्रा करनी पड़ती है पर कुछ ही दूर के लिए| यहाँ से कुछ ही दूरी पर रेलवे स्टेशन है जहाँ से लगभग सभी जगह के लिए ट्रेन मिल जाती है| हवाई साधन के लिए इलाहाबाद जाना पड़ता है एवं लोगों के पास अपने साधन भी है|

सुविधाएँ
स्वास्थ सुविधा
ग्राम पंचायत में एक स्वास्थ केंद्र है जिसमें एक एम. बी. बी. एस. डॉक्टर, एक समान्य डॉक्टर, एक नर्स, एक ए. एन. एम. बैठिति है एवं गाँव वालों का इलाज करते है स्वास्थ केंद्र होने की वजह से गाँव वालों को समान्य बीमारी के लिए शहर नही जाना पड़ता है उसका इलाज यहीं हो जाता है!

कृषि सुविधा
गाँव वालों के पास खेती करने के लिए पर्याप्त खेती है जिसमें वे लोग अपनी सुविधा के अनुसार फसल लगाते है खेतों में धान, गेंहूँ, मक्का, बाजरा, जौ, मटर, चना, दाल, गन्ना, एवं सब्जी आदि की खेती करते है और कुछ लोगों के बाग भी है जिसमें आम, अमरूद, जामुन आदि के पेड़ लगे है!

संचार सुविधा
पंचायत में लगभग 05% बेसिक टेलिफोन फोन है जो की भारत संचार निगम लिमिटेड के है और 75% लोगों के पास मोबाइल फोन है, और गाँवों में पी. सी. ओ. भी है|

बिजली सुविधा
इस पंचायत में लाइट की ज़्यादा समस्या नही है गाँव में लगभग 10 से 14 घंटे लाइट आती है जिसे गाँव वालों को कोई समस्या नही होती है पर लाइट का समय सही न होने के कारण कभी-कभी समस्या उत्पन्न हो जाती है!

रोज़गार सुविधा
नौकरी : पंचायत में लगभग 30% लोग नौकरी करते है (सरकारी / प्राइवेट), 40% लोग किसानी, 30% लोग मजदूरी करते है
फैक्टरी : इस ग्राम पंचायत के आस पास औधोगिक क्षेत्र नही है इस लिए यहाँ पर फैक्टरी कम या ना के बराबर है इस लिए लोगों के पास रोजगार कम है जिसके लिए उन्हे गाँव बाहर जाना पड़ता है |
गाँव में : गाँव में कृषि, पशुपालन, डेरी, सब्जी आदि का व्यपार होता है| मुस्लिम लोग मुर्गी पालन करते है, करीब गाँव में सभी प्रकार की फसलों की पैदा वार होती है|

जिला वाराणसी

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वाराणसी (काशी) की भूमि उम्र के लिए हिंदुओं के लिए परम तीर्थ स्थान दिया गया है. अक्सर कहा जाता बनारस के रूप में, वाराणसी पुरानी दुनिया में रहने वाले शहर है. मार्क ट्वेन ने ये कुछ पंक्तियाँ यह सब कहते हैं: “बनारस इतिहास से पुराना है, परंपरा से अधिक पुराने, पुराने भी कथा से और दो बार उन सभी के रूप में पुराने के रूप में एक साथ रखा लग रहा है”. हिंदुओं का मानना है एक है जो वाराणसी के देश पर मर जन्म और फिर से जन्म के चक्र से मुक्ति और स्वतंत्रता प्राप्त होगा शोभा बढ़ाई है कि. भगवान शिव और पार्वती का वास, वाराणसी के मूल रहे हैं अभी तक अज्ञात है. वाराणसी में गंगा को दूर करने के लिए मनुष्यों के पाप धोने की शक्ति है माना जाता है. गंगा कहा जाता है कि भगवान शिव की और वाराणसी में ट्रेस्सेस में अपने मूल है, यह शक्तिशाली है कि हम नदी के बारे में पता करने के लिए फैलता है. शहर सीखने का एक केंद्र और 3000 से अधिक वर्षों के लिए सभ्यता है. सारनाथ के साथ, वह जगह है जहां बुद्ध ज्ञान के बाद अपना पहला उपदेश, सिर्फ 10 किमी दूर, वाराणसी हिन्दू पुनर्जागरण का प्रतीक रहा है. ज्ञान, दर्शन, संस्कृति, परमेश्वर, भारतीय कला और शिल्प के प्रति समर्पण सभी सदियों के लिए यहाँ निखरा. इसके अलावा जैन, वाराणसी के लिए एक तीर्थ स्थान पर पार्श्वनाथ, 23 तीर्थंकर का जन्मस्थान माना जा रहा है.

वैष्णव और शैव है सह वाराणसी में सौहार्दपूर्वक अस्तित्व. मंदिरों में से एक नंबर के साथ, श्रीमती एनी बेसेंट उसके थियोसोफिकल सोसायटी ‘और पंडित मदन मोहन मालवीय, के लिए घर के रूप में चुना वाराणसी के लिए’ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, एशिया में सबसे बड़ी विश्वविद्यालय संस्थान. आयुर्वेद के वाराणसी में उत्पन्न होने के लिए कहा जाता है और प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद और कलन आपरेशन के रूप में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आधार माना जाता है. महर्षि पतंजलि, आयुर्वेद और योग के गुरू भी वाराणसी, पवित्र शहर के साथ संबद्ध किया गया था. वाराणसी भी अपने व्यापार और वाणिज्य के लिए मशहूर बेहतरीन रेशम और सोने और चांदी के शुरुआती दिनों के बाद ब्रोकदेस, खासकर के लिए. वाराणसी भी उम्र के लिए सीखने का एक बड़ा केंद्र रहा है. वाराणसी अध्यात्मवाद, रहस्यवाद, संस्कृत, योग और हिन्दी भाषा और सम्मानित लेखकों की पदोन्नति के साथ कभी प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद और तुलसी दास, प्रसिद्ध संत कवि जो राम चरित मानस लिखा है जैसे जुड़ा हुआ है. आप्ट्ली सांस्कृतिक रूप में बुलाया जाता है

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हमारा प्रदेश

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं आगरा, अलीगढ, अयोध्या, बरेली, मेरठ, वाराणसी( बनारस), गोरखपुर, गाज़ियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, फ़ैज़ाबाद, कानपुर। इसके पड़ोसी राज्य हैं उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार। उत्तर प्रदेश की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है।

सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर-प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना के मैदान हैं। करीब १६ करोड़ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश केवल भारत का अधिकतम जनसंख्या वाला प्रदेश ही नहीं बल्कि विश्व की सर्वाधिक आबादी वाली उप राष्ट्रीय इकाई है। विश्व में केवल पांच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त अमरीका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर-प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है।

उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर मे स्थित है। यह राज्य उत्तर मे नेपाल, तिब्बत दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व मे बिहार से घिरा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल मे फैला हुआ है यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद मे है। झांसी, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, आज़मगढ़, बरेली, मेरठ, मुज्ज़फरनगर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ, गोरखपुर, सहारनपुर, मथुरा, नॉएडा यहाँ के मुख्य शहर है।

इतिहास
राज्य- उत्तर प्रदेश सम्भागोँ की संख्या- 18 जिलोँ की संख्या- 72 तहसीलोँ की संख्या- 306 विश्वविद्यालयोँ की संख्या- 30 विधानमण्डल- द्विसदनात्मक विधान सभा सदस्योँ की संख्या- 403+1(एंग्लोइँडियन)=404 विधान परिषद सदस्योँ की संख्या- 99+1(एंग्लोइँडियन)=100 लोकसभा सदस्योँ की संख्या- 80 राज्यसभा सदस्योँ की संख्या- 31 उच्च न्यायालय- इलाहाबाद(खण्डपीठ- लखनऊ) भाषा- हिन्दी(उर्दू दूसरी राजभाषा) राजकीय पशु- बारहसिँगा राजकीय पक्षी- सारस या क्रौँच राजकीय पेड़- अशोक राजकीय पुष्प- ब्रम्ह कलश राजकीय चिन्ह- मछली एवँ तीर कमान स्थापना दिवस- 1 नवम्बर, 1956

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